

दोस्तों भारतीय एकता संगठन द्वारा आयोजित कवि सम्मलेन की झलकिया
प्रमुख कवि अशोक बेशर्म की रचना
पेडो से गिरने लगे पात तो समझो बसंत है
बन जाए कही बात तो समझो बसंत है
पि पाकर दूसरो के घर में कूद जावो और पड़ जाए दो चार लात तो समझो बसंत है
साहित्य की यह विधा हास्य की विधा है इसके अलावा अन्य कवियों में बिहारी लाल अम्बर , रसराज जी ,
आदि कवियों ने भी श्रोतावो का भर पूर मनोरंजन किया
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