Tuesday, January 27, 2009

कवि सम्मलेन 2008




दोस्तों भारतीय एकता संगठन द्वारा आयोजित कवि सम्मलेन की झलकिया


प्रमुख कवि अशोक बेशर्म की रचना


पेडो से गिरने लगे पात तो समझो बसंत है


बन जाए कही बात तो समझो बसंत है


पि पाकर दूसरो के घर में कूद जावो और पड़ जाए दो चार लात तो समझो बसंत है


साहित्य की यह विधा हास्य की विधा है इसके अलावा अन्य कवियों में बिहारी लाल अम्बर , रसराज जी ,


आदि कवियों ने भी श्रोतावो का भर पूर मनोरंजन किया


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