Saturday, December 27, 2008

काटे दो मुश्किले दो या बवाल दो मुझे
चाहे किसी जमात से निकाल दो मुझे
जाऊंगा मै जहा जन्नत वही बनौउगा
मर्ज़ी तुम्हारी अम्बर दो पाताल दो मुझे

मानव सेवा सच्ची सेवा
साहित्य समाज संसकृति सद्भावना संस्कार के प्रति समर्पित
मानवता के प्रति समर्पित
भारतीय एकता संगठन परिवार

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